जयपुर की आई.ओ.सी.एल. आग दुर्घटना

नवम्बर 6, 2009

तेल डिपो एव गैस गोदामों की स्थापना के पूर्व संबंधित कम्पनियों को तभी लाइसेंस दिये जाते हैं जब वे तय मानदण्डों पर खरे उतरते हैं या ष्षर्तों को पूरा करते हैं।इनकी स्थापना के साथ ही आसपास बस्तियों के विकास को रोका जाना चाहिये। अन्यथा जयपुर जैसी दुर्घटनाओं को रोक पाना संभव नहंि है।

दुर्घटनाएं होने के पष्चात कंपनियों द्वारा अपनाए गए सुरक्षा मापदण्डों पर सवाल उठाये जाते हैं। दुर्घटनाएं होने के बाद इन गोदामों को बस्तियों से दूर ले जाने की बातें भी कही जाती हैं। किन्तु क्या ये इन समस्याओं का स्थायी समाधान हैं। चूॅंकि इसबात की कोई गारंटी नहीं है कि वहां फिर बस्तियाॅं विकसित नहीं होंगी। यह एक अस्थाई समाधान हो सकता है किन्तु निदान तो कदापि नहीं।

दुर्घटनाओं के पष्चात मुआवजों की बातें भी होती हैं। यह सब कुछ सरकारी कोश से किया जाता है। जबकि ऐसी बस्तियों के विकसित होने के समय से लेकर दुर्घटनाएं होने तक जो भी अधिकारी उन सतर्कता विभागों में रहे हें
उनकी सम्पतियां छीन कर मुआवजे चुकाये जाने चाहिये और यदि वे जीवित हैं तो पकड़ कर कठोर दण्ड भी दिया जाना चाहिये।

दुविधा में आर एस एस

अक्टूबर 13, 2009

आर एस एस की भागवत-कथा राजगीर में दो दिन पहले एक नये अध्याय के साथ पढ.ी गई । इससे पहले राहुल व चिदम्बरम की प्रशंसा कर चुके भागवत ने राजगीर में  कहा कि संघ के स्वयं सेवको पर भाजपा को वोट देने का कोई दबाव नही हैं। इरका अर्थ यह निकला कि इसके पूर्व यह दबाव ्रथा । अन्यथा यह स्पष्टीकरण देने की आवश्यकता ही क्या थी ?वह भी मीडिया में आकर दूसरी ओर संघ -प्रमुख ने ऐसा  कुछ  नही कहा ।
लगता है कि लोक -सभा चुनावो में भाजपा की हार के बाद संघ भी बोखला गया है। भाजपा की अन्दरूनी खीचतान ने आखिर संघ की प्रतिष्ठा गिराई हैं।  जिसके लिये संघ के ही कई अधिकारी ,स्वयंसेवक  और  संघ द्वारा भाजपा में भेजे गये लोग जिम्मेदार हैं।  दूसरी ओर महाराष्ट्र में भागवत-दवाच को लेकर विपक्षियों को कोसा जा रहा हैकि वे भाजपा और संघ के विरूद्व कुप्रचार कर रहे है। इधर संघ के प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य का कहना हैकि संघ पूर्णरूप से भाजपा के साथ खडा है ।
लगता है संघ के शीर्ष अधिकारियों में कहीं तालमेल नहीं हैं । ऐसी स्थिति में संध भविष्य में किस दिशा को ग्रहण करता है यह निगरानी रखने वाली बात हैं।

मेरे प्रणाम

सितम्बर 28, 2009

प्रिय दोस्तो आप सबको नमस्कार

मेरे भीतर बैठी विराट सत्ता आपके भीतर विराजमान परम सत्ता को सर झुकाती है।  उस दिल को प्रणाम जो आपके जन्म से आज तक चल रहा है। उन फेफड़ों को प्रणाम जो आज तक आपको श्वास लेने में मदद दे रहे है। उन हडिड्यों के कंकाल को प्रणाम जो आपके शरीर को आकार दिये हुए हैं। उस पाचन शक्ति को नमन जो पहले दिन से आपके भोजन को ऊर्जा में बदलते है। स्नायू तन्त्र को प्रणाम जो दुनिया में व्याप्त समस्त टेलिफोन जाल से बड़ा है।

Hello world!

सितम्बर 26, 2009

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