तेल डिपो एव गैस गोदामों की स्थापना के पूर्व संबंधित कम्पनियों को तभी लाइसेंस दिये जाते हैं जब वे तय मानदण्डों पर खरे उतरते हैं या ष्षर्तों को पूरा करते हैं।इनकी स्थापना के साथ ही आसपास बस्तियों के विकास को रोका जाना चाहिये। अन्यथा जयपुर जैसी दुर्घटनाओं को रोक पाना संभव नहंि है।
दुर्घटनाएं होने के पष्चात कंपनियों द्वारा अपनाए गए सुरक्षा मापदण्डों पर सवाल उठाये जाते हैं। दुर्घटनाएं होने के बाद इन गोदामों को बस्तियों से दूर ले जाने की बातें भी कही जाती हैं। किन्तु क्या ये इन समस्याओं का स्थायी समाधान हैं। चूॅंकि इसबात की कोई गारंटी नहीं है कि वहां फिर बस्तियाॅं विकसित नहीं होंगी। यह एक अस्थाई समाधान हो सकता है किन्तु निदान तो कदापि नहीं।
दुर्घटनाओं के पष्चात मुआवजों की बातें भी होती हैं। यह सब कुछ सरकारी कोश से किया जाता है। जबकि ऐसी बस्तियों के विकसित होने के समय से लेकर दुर्घटनाएं होने तक जो भी अधिकारी उन सतर्कता विभागों में रहे हें
उनकी सम्पतियां छीन कर मुआवजे चुकाये जाने चाहिये और यदि वे जीवित हैं तो पकड़ कर कठोर दण्ड भी दिया जाना चाहिये।